राजस्थानी-हिन्दी कहावत कोश (6 खण्डों में)
राजस्थान प्रदेश को आमतौर पर एक शुष्क प्रदेश कहा जाता है। जहाँ तक पीने के पानी का सवाल है तथा खेती के लिए सिंचाई की व्यवस्था का प्रश्न है, उस माने में यह प्रदेश शुष्क जरूर है। किंतु जहाँ तक भाषा, संगीत एवं कला का सवाल है, यह प्रदेश अपने-आप में बहुत समृद्ध है। यहाँ की भाषा बहुत सरस, सजीव व पानी वाली है। साहित्य, संगीत और कला में यह प्रदेश बिल्कुल ही शुष्क नहीं है। साथ ही शूरवीरता के लिए तथा सतियों की तेजस्विता के लिए भी राजस्थान बहुत ही प्रसिद्ध प्रदेश रहा है। किसी कवि ने ठीक ही कहा है : Rajasthani Hindi Kahawat Kosh
सौर्य सरित बहती जहां, जूंझत खेत हमेस।
मारवाड़ अस देस कौ, मृढ़ कहै मरुदेस॥
राजस्थानी भाषा में कहावतों, मुहावरों, छोटे व बड़े कहानी – किस्सों का प्रचुर भंडार है। जितनी प्रकार की बोलियाँ इस प्रदेश के विभिन्न भागों में बोली जाती हैं, उन सभी में हजारों-हजारों की संख्या में कहावतें प्रचलित हैं। कहावतें प्रायः अनुभव पर आधारित हैं, जब कि कहानी – किस्से, गढ़े हुए होते हैं। शेखावाटी की तरफ कहावत को ‘कैवत’ कहते हैं । इस बारे में एक प्रसिद्ध कहावत भी है कि ‘कैवत बराबर साची नीं अर कहांणी बराबर झूठी नीं।’ Rajasthani Hindi Kahawat Kosh
Rajasthani-Hindi Proverb Dictionary
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