आरती भजन संग्रह (भाग 1)
धर्म में आस्था रखने वाले लोग अपनी उपासना, स्तुति, प्रार्थना, आरती व भजन द्वारा भक्ति करते है। सामाजिक परिस्थितियों में मानव प्रोढा अवस्था में भक्ति के पथ पर चलते है। आरती भजन से भक्ति भावना में लीन होकर एकाग्रचित से अपनी सामाजिक चिन्ताओं से मुक्ति पाते है। आरती-भजन के विविध पुष्पों का संकलन कर एक अनुपम “आरती-भजन संग्रह” का प्रकाशन मेरे द्वारा कराया गया। इस आरती-भजन संग्रह की यह विशेषता है कि इस संग्रह में आदर्श देवी-देवताओं के बाल्य अवरथा, विवाह, युवा अवस्था सम्बन्धी भजनों के संग्रह के साथ चेतावनी के भजन, हेली के भजन, सप्तवार के भजन, माता-पिता, गुरुदेव के भजन और अन्य कई तरह के भजनों का संग्रह कर 1001 भजनों एवं 23 आरतीयों का प्रकाशन किया गया है। भगवान के प्रति भजन की भावना मुझ में बाल्यावस्था से ही मेरे माता जी की प्रेरणा से थी। अब मेरी पुत्री के स्वर्गवास के पश्चात् मुझमें भजन संग्रह की भावना जागृत हुई और मैनें यह भजन संग्रह कर अपनी पुत्री को समर्पित किया है।








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