राजस्थान का भील समाज
प्रस्तुत ग्रन्थ राजस्थान की प्रमुख जनजाति भील समुदाय के इतिहास, समाज एवं संस्कृति के गहन अध्ययन पर आधारित है। जनसंख्या की दृष्टि से भील जनजाति भारत की सबसे बड़ी जनजातियों में से एक है तथा मारवाड़ क्षेत्र में इनकी उल्लेखनीय उपस्थिति रही है। इस क्षेत्र में भीलों का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है किन्तु विडम्बना यह है कि राजस्थान के इतिहास में उनके महत्वपूर्ण योगदान के बावजूद उन्हें उचित स्थान नहीं मिल सका है। Rajasthan Ka Bhil Samaj
राजस्थान के इतिहास-लेखन की परम्परा अत्यंत समृद्ध रही है, किन्तु यह मुख्यतः शक्तिशाली राजवंशों, शासकों एवं अभिजात वर्ग के आख्यानों तक ही सीमित रही है जबकि यह सर्वविदित है कि भील इस भूभाग के प्राचीनतम निवासी रहे हैं और राजपूतों के आगमन से पूर्व कई क्षेत्रों में उनका प्रभुत्व एवं शासन स्थापित था। इसके बावजूद इतिहास की मुख्यधारा में उनका उल्लेख सीमित और उपेक्षित रहा है।
प्रस्तुत अध्ययन का केन्द्र बिंदु भील समाज है तथा प्रमुख उद्देश्य सम्बंधित शताब्दियों के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में उनके जीवन का एक समग्र चित्र प्रस्तुत करना है। यह ग्रन्थ परम्परागत राजनैतिक इतिहास के विपरीत, सरल सौम्य स्वभाव वाले भील समाज की कथा को सामने लाने का प्रयास है, जो इतिहास के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बावजूद उपेक्षा का शिकार रहा है।
यह अध्ययन विशेष रूप से उस कालखंड पर केंद्रित है, जब भील समाज अपने अस्तित्व, पहचान एवं अधिकारों की रक्षा के लिए देशी रजवाड़ों एवं औपनिवेशिक सत्ता के विरुद्ध संघर्षरत था और साथ ही सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजर रहा था। इस ग्रन्थ में भील समाज के सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक एवं राजनीतिक पक्षों का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
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