राजस्थान में स्त्रियों के संघर्ष : पर्दे से परचम तक
राजस्थान (पूर्ववर्ती राजपूताना) क्षेत्र में सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए महिलाओं के वीरतापूर्ण संघर्ष इस अध्ययन का मुख्य केंद्र हैं। इन असाधारण महिलाओं के आत्मकथात्मक विवरण उनके सुरक्षित और सीमित जीवन से निकलकर आत्मविश्वासी और दृढ़ व्यक्तित्व के रूप में उनके रुपांतरण की यात्राओं को उजागर करते हैं। Rajasthan Striyon Ke Sangharsh
हुए यह पुस्तक यह भी दर्शाती है कि उन्होंने पारम्परिक और लैंगिक सीमाओं को चुनौती देते कठिन बाधाओं को पार किया और आध्यात्मिकता, राजनीति तथा शिक्षा जैसे अब तक ‘पुरुष प्रधान क्षेत्रों’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यद्यपि इन सक्रियकर्मियों के अनुभवों में सूक्ष्म और महत्वपूर्ण भिन्नताएँ हैं, फिर भी संघर्ष उनके जीवन का सार रहा है।
अपने अमूल्य योगदान के बावजूद, ये साहसी और उत्साही महिलाएँ दुर्भाग्यवश इतिहास और सार्वजनिक स्मृति दोनों में उपेक्षित रहीं हैं।
अत्यंत प्रसन्नता के साथ इन प्रेरणादायक और उल्लासपूर्ण कथाओं को पुस्तक में प्रस्तुत किया हैं, जो वीरांगनाओं की पर्दे से परचम तक की विलक्षण यात्रा को दर्शाती हैं। उनकी कथाएँ लम्बे समय से उजागर होने की प्रतीक्षा कर रही थीं- यह पुस्तक उन विलक्षण जीवन-यात्राओं का उत्सव है।
Rajasthan Mein Striyon Ke Sangharsh : Parde Se Parcham Tak | Womens Struggle in Rajasthan Crossing Barriers Claiming Spaces
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