विज्ञान के झरोखे से
जिज्ञासा प्रत्येक व्यक्ति का आनुवांशिकी स्वभाव है। इसी प्रवृत्ति से प्रेरित होकर वह बचपन से ही अपने आस-पास घटित होने वाली विभिन्न घटनाओं और परिघटनाओं के विषय में जानकारी प्राप्त करने की इच्छा रखता है। Vigyan Ke Jharokhe Se
शिक्षा सम्पूर्ण मानव क्षमता की प्राप्ति, वैश्विक स्तर पर सामाजिक न्याय और समानता, वैज्ञानिक उन्नति, सतत प्रगति और आर्थिक विकास की कुंजी है।
विज्ञान का ज्ञान प्रत्येक व्यक्ति के व्यक्तित्व को संवारने में अत्यन्त महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही यह ज्ञान के परिदृश्य में तेजी से होने वाले परिवर्तनों से परिचित कराता है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए यह ज्ञान उसे सतत सीखने के लिए प्रेरित करने के साथ ही समाज का एक सभ्य और संस्कारी नागरिक बनाने में सहायक सिद्ध होता है।
प्राचीन भारतीय परम्परा की ज्ञान पिपासु कथाओं जैसे श्रीमद् भगवत गीता में ‘ कृष्णअर्जुन संवाद’ अथवा कठोपनिषद में ‘यम – नचिकेता संवाद’ ‘उद्दालक ऋषि और श्वेतकेतु’ ( छांदोग्य उपनिषद् ) में भी यह दर्शन ‘आर्ट ऑफ क्वेश्चनिंग’ अर्थात प्रश्न पूछने की कला जिज्ञासा और चेष्टा को अभिव्यक्त करता है।
इसी प्रासंगिकता में वर्तमान परिस्थितियों में वृहद डेटा, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स (कृत्रिम बुद्धिमता) जैसे क्षेत्रों हो रहे वैज्ञानिक और तकनीकी विकास के इस युग विज्ञान के ज्ञान का महत्व और भी बढ़ चुका है। Vigyan Ke Jharokhe Se
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