बातां री फुलवाड़ी (भाग 1 से 14) (राजस्थानी लोक कथाओं का संग्रह)
बातां री फुलवाड़ी विजयदान देथा (बिज्जी) द्वारा लिखित रोचक, मनोरंजक और मजेदार राजस्थानी लोक कथाओं/कहानियाँ का संग्रह है, यह 14 भागों में प्रकाशित है तथा इसका हिन्दी संस्करण बातों की बगिया (Baton Ki Bagiya) के नाम से भी प्रकाशित हुआ है। Batan Ri Fulwari Vijaydan
1. बातां री फुलवाड़ी (भाग 1) Batan Ri Fulwari Vijaydan
- बाबासा री सीख : मुखड़ी
- चौधरण री चतराई
- मौका री उपज
- ठाकर रौ आसण
- हरड़-भुसंदा हौ
और भी बहूत कुछ…
2. बातां री फुलवाड़ी (भाग 2)
- गांव में खटाखट संगीत
- अकल सरीरां ऊपजै
- स्याळ री अकल अर सिंघ रौ बळ
- स्याळणी री अटकळ
- स्याळ रौ न्याव
और भी बहूत कुछ…
3. बातां री फुलवाड़ी (भाग 3)
- आठ राजकंवर – एक विवेचन
- चिड़ी रा बिचिया
- रांणी रौ इंतकाळ
- नवी रांणी
- रांणी छळगारी
और भी बहूत कुछ…
4. बातां री फुलवाड़ी (भाग 4) Batan Ri Fulwari Vijaydan
- ओळूं रा आखर
- साच रौ भरम
- आसा अमरधन
- वेमाता रा लेख
- न्यारा-न्यारा सुख
और भी बहूत कुछ…
5. बातां री फुलवाड़ी (भाग 5)
- कुबेर से सुबेर बेर-बेर ना आएगी
- मिनख जमारौ
- अमोलक खजांनौ
- गरू माराज री सीख
- संत नै संतावै दीसै
और भी बहूत कुछ…
6. बातां री फुलवाड़ी (भाग 6)
- ठाकर री मेहर-मया
- कंवर रौ सिकार चढ़णौ
- खेत री रुखाळी
- लाखीणी रात
- सोना रौ सूरज
और भी बहूत कुछ…
7. बातां री फुलवाड़ी (भाग 7)
- कीं दोरौ ई विसवास व्हैला…
- मां रौ बदळौ-एक विवेचन
- गांव रा वासी
- जच्चा री पीड़
- जच्चा रौ मोद
और भी बहूत कुछ…
8. बातां री फुलवाड़ी (भाग 8) Batan Ri Fulwari Vijaydan
- पग री जूती
- नांव रौ म्यांनौ
- पाप रौ बाप
- फेफ रा फूल
- काठ रौ हंस
और भी बहूत कुछ…
9. बातां री फुलवाड़ी (भाग 9)
- मनोविज्ञान के क्षेत्र में लोक-कथा
- नाहरसिंघ बछराजसिंघ
- दुमात री दाझ
- विस्वास री बात
- सातां नै गटकाय जावूं
और भी बहूत कुछ…
10. बातां री फुलवाड़ी (भाग 10)
- मणि कौल का एक पत्र
- लोक-कथाओं को समझने का उपक्रम
- रस-कस दिवलौ बळै
- बांड्यौ वीर
- काळिंदर री सुगराई
और भी बहूत कुछ…
11. बातां री फुलवाड़ी (भाग 11)
- कै अर मत-कै
- वेमाता रा आंक
- सुलखणौ भाई
- आदमखोर
- माठ
और भी बहूत कुछ…
12. बातां री फुलवाड़ी (भाग 12)
- न्यारी-न्यारी मरजाद
- वगत-वगत रौ बायरौ
- आहेड़ी
- मिनखां रौ अेवाळियौ
- अडांणौ जोबन
और भी बहूत कुछ…
13. बातां री फुलवाड़ी (भाग 13)
- दूजौ कबीर
- कांचळी
- दोवड़ी जूंण
- अळूझाड़
- लजवंती
और भी बहूत कुछ…
14. at last बातां री फुलवाड़ी (भाग 14) Batan Ri Fulwari Vijaydan
- संजोग
- डावड़ी रौ जमारौ
- मरवण
- हेम समाध
- अदीठ अंतस
और भी बहूत कुछ…
click >> अन्य सम्बन्धित पुस्तकें
click >> YouTube कहानियाँ
ISBN : 9788186103627, 9789386103635, 9788186103647, 9788186103654, 9788186103661, 8186103678, 8186103511, 818610352X, 8186103708, 8186103732, 8186103724, 8186103716, 8186103937, 8186103945
Batan Ri Fulwari (Vol. 1-14) (Collection of Rajasthani Folk Tales) (Bijji) Batan Ri Phulwari




























Reviews
There are no reviews yet.