Kurmyash Kalanidh Aamer ke Kachhwaha Shasakon ka Itihas

कूर्मयश कलानिध आमेर के कछवाहा शासकों का इतिहास
Author : Kaviraj Mohan Singh
Language : Hindi
ISBN : 9789385593321
Edition : 2018
Publisher : RG GROUP

150.00

कूर्मयश कलानिध आमेर के कछवाहा शासकों का इतिहास : क्षत्रियों के छत्तीस राजवंशों में कछवाह वंश की गिनती होती है। कछवाहों को ‘कूर्म’ भी कहते हैं। कूर्म के पौत्र ककुत्स्थ की संतति कछवाहा कहलायी। कछवाहा कुल के राजपूतों के मुख्य राज्य राजपूताने में जयपुर व अलवर में है। राजपूताने के बाहर कश्मीर, ग्वालियर के पास नरवर में भी कछवाहों का शासन रहा है। राजस्थान में इस राजवंश के संस्थापक दूल्हराय थे। दौसा से आकर दूल्हराय ने आमेर में इस राजवंश की स्थापना की। इन्होंने ढूंढाड में कछवाहों के राज्य को स्थापित किया। कुलदेवी जमवाय माता की कृपा से दूल्हराय ने ढूंढाड में मीणों को परास्त कर प्रारंभ में मांच पर विजय प्राप्त की थी। कवि चंद रचित ‘कूर्म विलास’ आमेर और जयपुर के कछवाहा (कूर्म) वंश के शासकों पर लिखा काव्य ग्रंथ है और इस काव्य में जयपुर राज्य के कछवाह शासकों का इतिहास विस्तार से 480 पृष्ठों में दिया गया है। यह ग्रंथ राजस्थान राज्य अभिलेखागार से प्रकाशित किया गया था। इसी क्रम में मेवाड़ के महाराणा फतहसिंह और महाराणा भूपालसिंह के दरबारी कवि कविराज मोहनसिंह ने ‘कूर्मयश कलानिधि’ नामक काव्य ग्रंथ की रचना की जिसमें आमेर व जयपुर के कछवाहा शासकों का दूल्हराय से लेकर महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय तक का संक्षेप में काव्यमय इतिहास दिया गया है। इस काव्यमय ऐतिहासिक रचना का सम्पादन श्री सौभाग्यसिंह शेखावत द्वारा बड़े विद्वतापूर्ण ढंग से किया गया है। इसमें दूल्हराय से लेकर सवाई मानसिंह द्वितीय के चित्र भी दिये गये है, जिससे पाठकों के लिए यह पुस्तक और भी अधिक उपादेय बन गई है।

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