चन्द्रगुप्त
महाकवि जयशंकर प्रसाद का जन्म 30 जनवरी 1989 को वाराणसी उत्तर प्रदेश में हुआ था। आपको उपन्यासकार, नाटककार, कवि, कहानीकार के तौर पर कई बार सम्मानित किया जा चुका है। Chandragupta | Chandragupt
‘चन्द्रगुप्त’ नाटक हिन्दी के श्रेष्ठतम नाटकों में से एक है, जो कि भारत के पहले साम्राज्य-निर्माता चन्द्रगुप्त मौर्य और उसके मार्गदर्शक महान कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य को केन्द्र में रखकर लिखा गया है। भारत के इतिहास में यह वह कालखंड है जब एक तरफ तो लगातार विदेशी आक्रमण हो रहे थे और दूसरी तरफ देशी राजा अपने झूठे अभिमान और क्षुद्र स्वार्थों के लिए आपस में ही लड़ रहे थे। ऐसे समय में आचार्य चाणक्य ने चन्द्रगुप्त के साथ सीमावर्ती राज्यों को संगठित कर यूनानी आक्रमणकारी सिकन्दर को मुँह तोड़ जवाब दिया। साथ ही, उन्होंने लोगों में ऐसी भावना का संचार किया कि वे मालव और मागध होने के प्रान्तीय अभिमान को भूलकर भारतवासी कहलाने में गौरव का अनुभव करें।
ऐसे ही आचार्य चाणक्य और चन्द्रगुप्त ने पहली बार, खंड-खंड विभाजित भारत को एक सूत्र में पिरोकर, एक विशाल साम्राज्य का निर्माण किया। इसी चन्द्रगुप्त को केंद्र में रखकर जयशंकर प्रसाद ने ‘चन्द्रगुप्त’ शीर्षक से नाटक की रचना की, जिसमें भारतीय, दर्शन एवं संस्कृति की झलक मिलती है।
प्रसंगवश, प्रेम, सौंदर्य आदि सरस अनुभूतियों से परिपूर्ण नाटक इतिहास एवं साहित्य प्रेमियों और छात्रों के लिए ही नहीं अपितु प्रत्येक भारतीय पाठक के लिए भी उपयोगी, पठनीय एवं संग्रहनीय है।
मुख्य रचनाएँ: कामायनी, चित्राधार, आँसू, लहर, झरना, एक घूँट, विशाख, अजात शत्रु, आकाशदीप, ध्रुवस्वामिनी, स्कन्दगुप्त, गुंडा, तितली और कंकाल। Chandragupta | Chandragupt
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