लोकदेवता वीर गोगादेव राठौड़
लोकदेवता वीर गोगादेव राठौड़ रै समग्र व्यक्तित्व अर कृतित्व नै भलीभांत उजागर करती पोथी : भारत रै धरम अर संस्कृति री जगत मांय महताऊ ठौड है। भारतीय संस्कृति री आध्यात्मिकता जीवंत परंपरा रैई है। प्राचीन काल सूं ही भारत अक धरम परायण देश रै रूप में जग चावौ है। surely भारतीय संस्कृति री सबसूं लूंठी खासियत ई धारमिकता है। कौ गौ है के ‘धारयति इति धर्म’ जकौ धारण करण जोग है बो ही धरम है। धरम रौ प्रभाव समाज अर मानखै माथै घणौ ऊंडौ हुवै। राजस्थान में ई धरम अर अध्यात्म री महताऊ ठौड रैई है। LokDevta Veer Gogadev Rathore
आस्था विश्वास अठा रा लोक संस्कारां में रचिया – बसिया है। औ प्रदेश अठा री प्रकृति, संस्कृति आपरी न्यारी निरवाळी छिब राखै। so इण भौम माथै पौराणिक अवतारां री मानता आद जुगाद सूं रैयी है। इण भौम रा मानवी ई आपरै लोक हितकारी काम, निस्काम सेवा-भाव, समाज उद्धारक, गौ रिच्छा, सरणागत वत्सलता आद भावां रै कारण इण धरा माथै चावा व्हिया अर लोक देवी-देवता रै रूप मांय पूजीज्या अर इणी खातर कहिजै कै-
सिवरूं उण हि भाव नै, परहित करै जो काम।
मूंडै सूं मांगे नहीं, धरै धणियां रौ नाम।।
राजस्थान मांय लोक देवी-देवतावां री घणी लूंठी परंपरा रैयी है। अठा री समाजिक, धार्मिक, सांस्कृतिक व्यवस्थावां नै बणायोड़ी राखण मांय लोक देवी-देवतावां री घणी महताऊ भूमिका रैयी है अर आज ई नूवी दिसा समाज नै देवै है।
LokDevta Veer Gogadev Rathore
लोक, भारतीय संस्कृति रौ घण महताऊ पख है। लोक आपरी परंपरावां, नै सहेजै, मानै, उण मांय जीवै। लोक विस्वास में लोक मंगळ रा भाव व्है अर जन मानस में रचिया – बसिया औ लोक विस्वास लोक मानस री सरलता, संवेदनसीलता, निस्छलता अर आस्था नै उजागर करै। मरु भौम रै हरेक गांव में सती-सूरमावां री स्मृति में देवळियां बण्यौड़ी जठै इणां री ‘पूजा’ लोक उच्छब रै रूप में मेळा भरीजै। all in all प्रेम अर कर्तव्य मांय सूं कर्तव्य नै सर्वोपरि मानण वाळा वीर पुरखां रै आख्यानां सूं राजस्थान रौ वीर काव्य भरियौ है।
also राजस्थान री संस्कृति अड़ा महान वीर पुरुखां रै आदर्शां सूं ओतप्रोत है। मध्ययुगीन राजस्थान रै समाज में भेदभाव, ऊंच-नीच री भावना चरम माथै ही अर अ अबखै बखत मांय आपरै असाधारण व्यक्तित्व रै पांण अड़ा प्रणवीर जोधा साम्ही आया जका जनता रै हितां, गायां री रिच्छा, निचली जातियां नै समाज में ठावी ठौड़ थापित करण सारू आपरौ जीवण होम दियौ अर गांव-गांव, ढाणी-ढाणी लोकदेवता रै रूप में पूजीजण लाग्या जिण मांय गोगाजी, पाबूजी, तेजाजी, रामदेवजी, हड़बूजी, कल्लाजी, मल्लिनाथजी आद पूजनीक देवता है।
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