ठाकुर रामसिंह तंवर रौ राजस्थानी भासा आंदोलन में योगदान
accordingly 20वीं सदी रा प्रसिद्ध राजस्थानी भासा, साहित्य, इतिहास अर संस्कृति री नूवी दीठ सूं अलख जगावण वाळा राजस्थानी मायड़ भोम रा लूंठा ठाकुर रामसिंहजी आपरी भणाई बी.एच.यू. सूं पूरी करियां पछै जद बीकानेर राज रा शिक्षा निर्देशक बणिया उणी समै राजस्थानी ग्रंथां अर लोक साहित्य रै सिरजण रौ काम आपरा भायला पंडित सूरजकरणजी पारीक सागै सुरू करियौ अर आगला दस बरसां मांय केई अमोलक पोथियां रौ प्रकासन कर अेक नूवौ राजस्थानी साहित्य रौ अध्याय सरू करियौ। ठाकुर साहब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय सूं भणाई करी अर वे पंडित मदन मोहन मालवीयजी रा परम शिष्य ई रैया। Ramsingh Tanwar Rajasthani Bhasha
also ढोला मारू, वेली क्रिसन रुकमणि री, राजस्थानी रा लोक गीत अर ग्राम गीतां री सांवठी पोथियां रौ प्रकासन अर संपादन अेक क्रांति री सरूआत ही। लगोलग ठाकुर साहब आपरा मित्रां रै साथै केई जूनी राजस्थानी पोथियां अर लोक में संग्रहित राजस्थानी रै साहित्य नै आखी दुनिया में चावा करण रौ काज करियौ। उणां रै आं कामां सूं साहित्य जगत में मायड़ भोम खातर अेक नूवी सरूआत हुई।
surely ठाकुर रामसिंहजी 1930 सूं लेय’र 1975 में उणां रै सुरगवास तांई केई मोटा-मोटा कार्यक्रमां में राजस्थानी भासा री मानता री आवाज उठाई अर नूवी पीढी उणां रै भासणां सूं आज ई पे्ररणा लेवै। दीनाजपुर अधिवेशन 1944 रौ भासण आज ई राजस्थानी रौ संविधान कहीजै। औ अखिल भारतीय साहित्य सम्मेलन हौ जिणमें सभापति रौ दायित्व ई आप निभायौ। इण सूं पैला ठामुर साहब चुरू में बीकानेर राज्य साहित्य सम्मेलन में ई सभापति रै रूप में आपरौ महताऊ भासण दियौ हौ। इणां भासणां रा प्रकासन लगोलग होवता रैया है अर राजस्थानी विभाग जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर कांनी सूं ई प्रो. कल्याणसिंहजी शेखावत इणरौ प्रकासन कर नै नूवी पीढी नै उणां रै योगदान सूं परिचय करावण रौ सरावणजोग काज करियौ हौ।
Thakur Ramsingh Tanwar Ro Rajasthani Bhasha Aandolan Men Yogdan
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