Ramante Tatra Devta

रमन्ते तत्र देवता
Author : Hariprakash Rathi
Language : Hindi
Edition : 2026
Pages : 213
Cover : Paperback/Softcover
ISBN : 9789372450408
Publisher : Rajasthani Granthagar

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रमन्ते तत्र देवता

इस उपन्यास के लिखने का एक और कारण विश्व की आधी आबादी विशेषतः भारतीय स्त्रियों को उनका वाज़िब सम्मान दिलाने का प्रयास भी है। आपहम सभी जानते हैं तमाम सरकारी एवं सामाजिक प्रयासों के बावजूद दहेज प्रताड़ना, बलात्कार एवं स्त्रियों के प्रति दुराग्रह का भाव आज भी मिटा नहीं है। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पंक्तियां ‘अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी आँचल में दूध और आंखों में पानी’ पहले से अधिक अब प्रासंगिक है। स्त्री शिक्षा के आंकड़ों में कितना ही सुधार हुआ हो, वह आज भी दोयम दर्जे की नागरिक है। कामकाजी स्त्रियों की स्थिति और पीड़ास्पद है। Ramante Tatra Devta

वे घर-बाहर दो मोर्चों पर लड़ रही हैं एवं आगे लंबे समय तक आशा की कोई किरण नजर नहीं आती। पहले समाज बदले, परिवेश बदले, दृष्टिकोण बदले, सकारात्मक परिवर्तन तत्पश्चात ही सम्भव है। विवाह से लेकर मृत्यु तक आज भी सारे रीति-रिवाज स्त्री के विरुद्ध हैं। लड़के वाले के घर कोई उत्सव हो, जेब लड़की वाले की कटती है। जनसंख्या का स्त्री-पुरुष अनुपात आज भी पुरुष के पक्ष में है। यह कैसी विडंबना, कैसा आश्चर्य है कि स्त्रियां कम होते हुए भी आज भी लड़के की चाह सिर चढ़कर बोलती है। जब तक स्त्री विकास की अवरोधक कुरीतियों का उन्मूलन नहीं होता, समकक्षता की लड़ाई दूर की गोटी है।

इस उपन्यास के सृजन का एक अन्य कारण जन्मभूमि जोधपुर का कर्ज़ उतारने का भाव भी रहा है। जोधपुर थार एवं मारवाड़ दोनों का सिंहद्वार है। यहां के बाशिंदे न सिर्फ विद्वान, मेहनती होते हैं, लोकोपकार के परमभाव से भी लबरेज होते। Ramante Tatra Devta

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