Vichardharao Ke Jungal Mein Bhatakta Prem

विचारधाराओं के जंगल में भटकता प्रेम
Author : Dr. Vikash Singh
Language : Hindi
Edition : 2026
ISBN : 9789372453225
Publisher : Rajasthani Granthagar

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विचारधाराओं के जंगल में भटकता प्रेम

किसी भी समाज की नींव उसके विचारों, संवेदनाओं और अनुभवों आधारित होती है। ये विचार और अनुभव जब शब्दों में ढलते हैं, तो वे लघुकथाओं के रूप में हमारे सामने आते हैं। लघुकथाएँ केवल कहानियाँ नहीं होतीं, बल्कि ये जीवन के उन अनकहे पहलुओं को उजागर करती हैं, जो हमारे चारों ओर घटित होते हैं। यह लघुकथा संग्रह ‘विचारधाराओं के जंगल में भटकता प्रेम’ में हमें ऐसे ही विचारों और संवेदनाओं की एक झलक मिलती है। Vichardharao Jungal Bhatakta Prem

इस संग्रह में प्रस्तुत 16 लघुकथाएँ न केवल प्रेम, रिश्तों और सामाजिक मुद्दों की गहराई को छूती हैं, बल्कि ये हमारे समय की जटिलताओं को भी बयां करती हैं। विभिन्न पात्रों के माध्यम से उन संघर्षों को चित्रित करते हुए मैंने अपने व्यक्तिगत और सामाजिक अनुभवों को आप सभी सुधी पाठकों से साझा करने का प्रयास किया है। ये कहानियाँ हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या हम अपने विचारों और धारणाओं के जंगल में भटकते हुए अपने सच्चे प्रेम को पहचान पा रहे हैं?

प्रेम, जो एक अद्भुत भावना है, कभी-कभी विचारधाराओं के जाल में उलझकर रह जाता है। मैंने इस संग्रह में प्रेम की इस जटिलता को बखूबी दर्शाने का प्रयास किया है। कहानियों के पात्र न केवल अपने प्रेम को खोजते हैं, बल्कि वे अपने विचारों और समाज की अपेक्षाओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश भी करते हैं। Vichardharao Jungal Bhatakta Prem

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