चिबटी भर चांदणौ
जीयाजूण नै समै री ओळख करावती कवितावां : इण प्रकृति रौ सिरजणकरता आपरी सिरजण कळा में घणौ दक्ष। accordingly उणरी प्रकृति री भांत भांतिली छिबां इण संसार नै अणूंतौ सोवणौ नै हदभांत मोवणौ सरूप दियौ, पण चतुर सुजाण सिरजणहार रै इण आखै रचाव में सैं सूं सिरै, मिनख जात रौ सिरजण! जिणरी होड में सगळी दूजी बातां फीकी। सिरजणहार आपरी इण इधकी रचना मिनख नै बुद्धि नै भाव रूपी दो आंखियां दीनी जकी इणनै बाकी सैं जीवां सूं न्यारी नै निकेवळी ओळखांण देवै। ओक कांनी मिनख आपरी बुद्धि सूं, विवेक सूं आखी प्रकृति नै जीतण री खिमता राखै तौ दूजी कांनी संवेदनावां रौ आगार औ हेत-प्रीत दया करुणा जिसा भावां रै पांण पूजीजै। Chibati Bhar Chandano
Chibati Bhar Chandano (Rajasthani Kavita Sangrah)
औ इज मिनख जद सत्यं शिवं सुंदरं जिसा साहित्य – हेतु नै लक्ष्य बणाय आपरी लेखणी रै पांण जीवा-जूंण री हरख पीड़ नै आखरां ढाळण री खेचल करै तद वो समाज में साहित्यकार रै रूप ओळखीजै। but यूं तौ सगळा मिनखां नै समाज में रैवतां थकां आपरै आखती पाखती सूं केई अनुभव मिळै पण साहित्यकार कीं बैसी संवेदनशील हुवै। वौ झीणौ जोवै अर झीणी ई दीठ सूं मैसूस करै अर जद औ साहित्यकार जीव-जगत, जात-समाज री आछी-भंडी बातां रै लेखे आपरा अणभवां री अभिव्यक्ति करै, उणरौ साहित्य साच बण प्रगटै, मिनख अर समाज रौ हित साधै ‘हितेन सह तस्य भाव: साहित्यम्’ इज साचौ साहित्य।
surely साहित्य सदा मिनख रौ चित पखाळ उणनै नाजोगी बातां सूं अळगौ राखण सारू आफळै अर औड़ी इज ओक लूंठी आफळ कीनी है, इण काव्य संग्रह रा रचैता डॉ. भवसिंह राठौड़। जिणां रै काव्य रै केंद्र में है मिनख अर फगत मिनख। जकौ मिनखीचारै री बुझती लोय नै कविता रूपी हाथ री ओट देय बचावतौ दीसै तौ कदैई आसावादी सुर में हूंस बपरावतौ बदळाव सारू बोकारै। घणखरी कवितावां में कवि री सुधारवादी दीठ सांम्ही आवै।
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