भारतीय कथा साहित्य में बाल मनोविज्ञान
भारतीय कथा साहित्य में बाल मनोविज्ञान का अध्ययन करना आज की बदलती जीवन शैली के समक्ष कोमल बाल मन हृदय की संवेदनाओं को जानना अत्यंत ही आवश्यक है क्योकि यह हमारे देश का भावी भविष्य है। इनकी जिज्ञासाओं को शांत करना लेखक का ही नहीं, परिवार समाज और परिवेश के समक्ष भी चुनौती है। Katha Sahitya Baal Manovigyan
साहित्यकार अपने सम्पूर्ण जीवन के अनुभवों को समेटकर पाठक के समक्ष रख देता है जिससे हमारें आस-पास हो रहे बालमन को पढ़े, समझे और उचित निराकरण में सहायता दें।
आज भाग-दौड़ भरी जिन्दगी में बचपन कहीं खो रहा है और उसी के दुष्परिणाम परिवार के ताने-बने को बुनने में असफल हो रहे है। इस विषय पर अनेक रचनाओं के उदाहरण से शिक्षा लेकर बच्चों का और देश का भविष्य सुरक्षित रखा जा सकता है। हमारें साहित्यकारों के इस अतुलनीय योगदान को हम समझे यहीं मेरा उद्देश्य है। Katha Sahitya Baal Manovigyan
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