किसी दिन मैं पेड़ बन जाऊँगा
यदि किसी व्यक्ति के बारे में यह दावे के साथ कहा जाए कि वह वृक्ष के हृदय पर कान रखकर उसकी धड़कन सुन सकता है या किसी बेल को स्पर्श कर उसकी रगों में रस – संचार को अनुभूत कर सकता है तो यह हुनर कवि-लेखक दशरथ कुमार सोलंकी में मौजूद है। वे स्वयं इसे पेड़ के प्रति प्रेम का प्रतिदान या सही अर्थों में वरदान मानते हैं। Main Ped Ban Jaunga
दशरथ कुमार सोलंकी का मन प्रकृति, संस्कृति, गाँव और लोक में रमता है जो इनके व्यवहार और अभिव्यक्ति में परिलक्षित होता है। ख़ाली समय में पेड़ का साथ भाता है इन्हें। चार कविता संग्रह और एक ललित निबंध संग्रह के उपरांत दशरथ का यह कविता-संग्रह ‘पेड़’ पर केंद्रित है जिसमें पेड़ के विविध आयामों पर अनुभूतियों का रचाव है।
राज्य की वित्त एवं लेखा सेवा के अधिकारी दशरथ कुमार सोलंकी के इस संग्रह की कविताओं में पेड़ के अंतस् की आवाज को महसूस किया जा सकता है। हृदय पर पेड़ की पत्ती जैसा नम व नरम अंकुरण हो – सभ्यता के आधुनिक दौर से इससे अधिक काम्य क्या हो सकता है! Main Ped Ban Jaunga
click >> अन्य पुस्तकें
click >> YouTube कहानियाँ






Reviews
There are no reviews yet.