झरना ठहाकों का (हास्य-व्यंग्य काव्य संग्रह)
काव्य संग्रह ‘झरना ठहाकों का पूर्ण रूप से मौलिक रचना है तथा इसकी कुछ कविताएँ मेरी यू-ट्यूब चैनल पर आंशिक रूप से प्रसारित की गई है। हिन्दी साहित्य के महान् कवि तथा संतवाणी के प्रभाव तथा जन-जीवन की सामान्य घटनाओं को इसका आधार बनाया गया है। व्यक्ति के जीवन में संघर्ष तथा तनाव को कम करने के लिए इसकी शैली को ‘हास्य – व्यंग्य’ प्रधान रखा गया है। इसमें मानवीय मूल्यों, पास्परिक संबंधों, सामाजिक, राजनैतिक विसंगतियों पर व्यंग्य किया गया है। Jharna Tahako Ka
इसमें धूमपान निषेध, शराबंदी का समर्थन, जागरूक मतदाता का महत्व, शिक्षक पदक गरिमा, शहरों का नियोजित विकास, छायावादी प्रकृति चित्रण तथा जीवन दर्शन का मार्मिक चित्रण कविताओं के माध्यम से करने का प्रयास किया गया है। अंत में विविध गज़ल प्रस्तुति के द्वारा पाठकों में रूचि जाग्रत करने का प्रयास किया गया है। इसमें विकसित राष्ट्र, समर्थ युवा शक्ति तथा आदर्श समाज की कल्पना की गई हैं। इस काव्य संग्रह का उद्देश्य किसी व्यक्ति समाज, वर्ग विशेष को बुरा न बताकर श्रेष्ठ जीवन शैली तथा उच्च विचारों की स्थापना करना है।
मेरी कविता की शब्दावली अथवा भावों के द्वारा यदि किसी के दिल को आघात लगता है तो मैं इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ, परन्तु ऐसी कोई भावना नहीं है। विश्व कल्याण तथा सर्वजन हिताय ही काव्य संग्रह का प्राण है। ‘हास्य-व्यंग्य’ को सजीव बनाने के लिए कुछ शब्दों को उलट-पलड़ करना जरुरी है। काल्पनिक अथवा किसी चरित्र को लेकर गलत बात पर लपेटना इसकी खूबी है ताकि समाज में कुरीति, नशा, अपराध तथा व्यभिचार को रोका जा सकें। आदर्श समाज की स्थापना इसका आशावाद है। Jharna Tahako Ka
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