Shalihotradi Ashvashastram

शालिहोत्रादी अश्वशास्त्रम् (हयविशंती)
Editor : Dr. ShriKrishna Jugnu, Dr. Anubhuti Chauhan
Language : Hindi
Edition : 2024
ISBN : 9788197544620
Publisher : Rajasthani Granthagar

Original price was: ₹795.00.Current price is: ₹649.00.

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शालिहोत्रादी अश्वशास्त्रम् (हयविशंती)

अश्व, हाथी, ऊँट, गाय सहित सरिसृप आदि को साधना और नियन्त्रित करना कला की कोटि में आता है। इसे विद्या भी कहा जाता है। इन विद्याओं के विषय में शास्त्रों में जो प्रमाण मिलते हैं, वे समय-समय पर हुए अनुभवों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हैं क्योंकि कोई ज्ञान अचानक और एकाएक विकसित नहीं हो जाता। अनेक अनुभवों, प्रयोगों, संगीतियों-सम्मेलनों में हुए संवादों के निष्कर्ष के रूप में हमारे यहाँ विद्यात्मक ग्रन्थों की रचना हुई है। आगम, पिटक ही नहीं, चरकसंहिता जैसे ग्रन्थ भी हमें विद्वानों की संगीतियों का परिणाम ज्ञात होते हैं। विद्वान से किए गए प्रश्न और प्राप्त हुए उत्तर भी गोष्ठी और शबद से लेकर ग्रन्थ के रूप में मिलते हैं। निश्चित ही जिज्ञासाओं ने ज्ञान-ग्रन्थों की रचना में बहुत सहायता की है। इन्होंने मानवीय समाज की अनेक आवश्यकताओं को पूरा किया है। Shalihotradi Ashvashastram

हालांकि विद्या के रूप में छह अंग, चार वेद, धर्मशास्त्र, मीमांसा और तर्क शास्त्र को गिना गया है और इन्हीं से हजारों विद्याओं का विकास हुआ है जिनमें भी आयुर्वेद, सस्यवेद जैसे वर्गभेद होते हैं। इनमें आत्मविद्या सांसारिक भय का विनाश करती है, वह सभी दुःखों का विनाश करती है और सभी पापों का नाश भी। इन्हीं विद्याओं की शाखाओं के रूप में बहुत से भेद – उपभेद होते हैं जिनमें कुछ कला विद्या हैं और उनमें भी शिल्प विषयक विद्याएँ हैं, जैसा कि कृत्यकल्पतरु में देवीपुराण से मत से कहा गया है। Shalihotradi Ashvashastram

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