हैवानियत का सेनापति
इस संसार में उपयोग करने हेतु वस्तुओं की कमी नहीं है, अगर वो समानता से सभी को प्राप्त हो। भोजन, पानी, जिंदगी की तमाम आवश्यक लगने वाली वस्तुओं से भी महत्त्वपूर्ण है। जब जन्म होता है तब से मनुष्य आनंद को तरसता है वो संसार में आनंद को खोजता है वो ज्यादा एकत्रित करने की चेष्टा में दूसरों को हानि पहुँचाता है। फिर जन्म होता है लालच, घमंड और जल का, जिन्हें नुकसान होता है वो बदले की प्रतीक्षा करते हैं। शैतान का जन्म यहीं से होता है। इच्छापूर्ति होने पर मानव मन शांत नहीं बैठता, वो नई इच्छाएँ बनाता है और पूरा न होने पर आपा खो बैठता है। Haivaniyat Ka Senapati
Haivaniyat Ka Senapati | Commander of Savagery
एक सुंदर और मनप्रिय स्थान है क्षितिज – ब। वहाँ चारों ओर प्रकृति ने सुंदरता का मनोरम दृश्य बिछा रखा है। वहाँ खुबसुरत झरनें, झीलें, पहाड़ आदि किसी दूसरे संसार में भी नहीं होंगे। उन झीलों में चमचमाता पानी हरे पेड़ों और लंबी घास के मैदान के बीच में मछलियाँ नृत्य कर रहीं हैं, जल के भीतर। पानी बहुत सा है, ठहरा हुआ होकर भी सड़ा नहीं। यह चमत्कार है, उस झील के पानी को पीने वाले रोगों से दूर रहते हैं, उम्र बढ़ जाती है, जवानी बढ़ जाती है।
वो मछलियाँ भी करोड़ों सालों से जिंदा है, प्रसन्न होकर वे नृत्य कर रही है। आस-पास मेंढक, साँप, बिच्छु बेफिक्री से टहल रहे हैं। उस झील के किनारे पेड़ों पर लगे फल खाकर सभी जीव ताकतवर व बुद्धिमान हो गए हैं। पेड़ भी तो उस झील – जल से इतने विक्राल हो गए हैं, वही जल उनकी जड़ों से पत्तियों में जाता है, नस- नस में रमता है।
झील को आज तक किसी ने न देखा, व सुना। क्षिहैवानियत का सेनापतितिज – ब पर हर संसार की तरह अनेक प्रकार के वृक्ष, जीव वास करते हैं। इंसानों की भी प्रजाति है वहाँ। जिन्हें अहंकार और माया के आगे घुटने टेक दिए। हर तरफ अंधकार और अज्ञानता का मायाजाल है परंतु यह उन मानवों को अब नहीं समझाया जा सकता।
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