बरगद भारती
उपन्यास की विषय वस्तु आजादी के संक्रान्ति काल में देश के सुदूर पश्चिमी राज्य राजपूताना के निम्न मध्यम वर्ग की आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति है। ग्रामीण जन जीवन की मान्यताएँ, रोजगार के साधन एवं अकाल महामारी की विभीषिकाओं का भावपूर्ण चित्र प्रस्तुत किया गया है। इसके अतिरिक्त संस्कारों व आनुवांशिकता पर वातावरण का अत्यधिक प्रभावी होने को दर्शाया। एक आदर्श छोटे किसान का स्वरूप दिखाया गया है। समग्र रूप से देखें तो उपन्यास में यह बताने की कोशिश की गई कि – साधु हो तो कैसा हो? और गृहस्थ हो तो कैसा हो? Bargad Bharti (Hindi Novel)
उपन्यास में करुण रस की प्रधानता है जो हृदय व मानस को मर्मस्पर्शी एवं भावपूर्ण संवेदनाओं से ओतप्रोत कर देता है। महाकवि भवभूति न तो शृंगार एवं वीरादि रसों की अपेक्षा करुण रस को प्रधान रस माना है उन्होंने अपनी कृति ‘उत्तररामचरित्रमानस’ में कहा है- “एको रसः करुण एवं”
आशा है पाठकों को यह रचना सम्मोहित कर मनोरंजन करायेगी। Bargad Bharti (Hindi Novel)
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