भारत का आर्थिक इतिहास (1200-1947)
मुस्लिम काल से लेकर औपनिवेशिक कालीन भारत (1200-1947) के आर्थिक इतिहास पर हिन्दी में लिखी गयी यह नवीनतम पुस्तक है। accordingly पुस्तक की विषय वस्तु तीन अध्यायों, सल्तनत काल, मुगल काल तथा औपनिवेशिक काल में विभक्त है। भारत के आर्थिक इतिहास पर समग्र रूप से लिखी गयी पुस्तक का अभाव है। पुस्तक के लेखन का उद्देश्य विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाओं में हिन्दी माध्यम से अध्ययन करने वाले छात्रों को भारत के आर्थिक इतिहास पर पाठ्यक्रमानुसार विषय सामाग्री उपलब्ध कराना है। वस्तुतः यह पुस्तक मुस्लिम काल से ब्रिटिश राज तक की आर्थिक नीतियों और आम जनता पर पड़ने वाले प्रभावों के विभिन्न पहलुओं को सही रूप में समझने में सहायक सिद्ध होगी। Bharat Ka Arthik Itihas
surely लेखक ने जिन विषयों को विवेचन के लिए चुना है, उनमें मुस्लिम शासकों की भू-राजस्व नीति, कृषि व्यवस्था एवं किसानों की स्थिति, उद्योग धन्धे तथा व्यापार एवं वाणिज्य, मुद्रा नीति और बैंकिंग व्यवस्था शामिल है। इसी प्रकार ब्रिटिश शासन काल की भू-राजस्व व्यवस्था, कृषि की प्रवृत्तियाँ, व्यवसायिक संरचना, सिंचाई, अकाल, ऋणग्रस्तता, कृषि का व्यवसायीकरण, आयात एवं निर्यात, बाह्य व्यापार, ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासन का प्रभाव तथा भारत में वि-औद्योगीकरण आदि से सम्बन्धित औपनिवेशिक नीति को सही परिप्रेक्ष में रखने का प्रयास किया गया है।
all in all पुस्तक की भाषा अत्यन्त सरल है जो इतिहास के विद्यार्थियों एवं इतिहास में रूचि रखने वाले पाठकों के लिए ज्ञानवर्धक तथा सामाजिक-आर्थिक विकास को व्यापक आधार पर समझने में अत्यन्त सहायक सिद्ध होगी।
Bharat Ka Arthik Itihas (Economic History of India)
इतिहास के लिए कोई विषय बस्तु न तो उसके गौरव के प्रतिकूल है और न ही कोई अध्ययन क्षेत्र उसके ज्ञान क्षेत्र के बाहर होता है। जनता के समस्त कृतित्व एवं उत्पीड़न इतिहास की विषय बस्तु होती है। आर्थिक इतिहास भी अध्ययन का कोई अलग विषय नहीं अपितु इतिहास से सम्बद्ध किसी देश के इतिहास के उस कालखण्ड के राजनीतिक- सामाजिक ढांचे के अन्तर्गत विद्यमान अर्न्तसम्बन्धों द्वारा रचा जाता है जिसमें जनता के आर्थिक क्रियाकलापों का महत्वपूर्ण योगदान होता है।
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