Raghuvarjasprakas

चारण किसनाजी आढ़ा विरचित ‘रघुवरजसप्रकास’
Editor : Girdhardan Ratnoo Dasodi
Language : Rajasthani
Edition : 2026
ISBN : 9788198955203
Publisher : Rajasthani Granthagar

Original price was: ₹500.00.Current price is: ₹399.00.

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रघुवरजसप्रकास

राजस्थानी साहित्य को पल्लवित और पुष्पित करने में चारण मनीषियों का वरेण्य व महनीय निर्विवाद् अवदान रहा है। राजस्थानी गद्य और पद्य में चारण कवीश्वरों ने सतत् रूप से अपनी सृजनात्मक क्षमता, प्रज्ञा व प्रतिभा के मणिकांचन संयोग को समय-समय पर सिद्ध किया है। Raghuvarjasprakas

जब हम चारण कवियों द्वारा विरचित साहित्य का अध्ययन करते हैं तो हमारे समक्ष जो बड़े नाम उभरकर आते हैं, उनमें एक नाम आता है कविश्रेष्ठ दुरसाजी आढा का। दुरसाजी ने अपने जीवन में असाधारण सामाजिक प्रतिष्ठा व सुख सम्पदा की प्राप्ति की, वो उनके समकालीन अन्य कवियों को कम ही मिली। न केवल दुरसाजी स्वयं ने विपुल मात्रा में राजस्थानी रचनाएं लिखकर हमारे साहित्य को गौरव दिलाया, अपितु उनकी संतति की भी राजस्थानी साहित्य को दिए अवदान को स्वर्णाक्षरों में अंकित किया जाए तो भी हम उसका समग्र मूल्यांकन कर नहीं पाएंगे। जब हम दुरसाजी की संतति के सृजित साहित्य का अध्ययन करते हैं, तो हमारे सामने किसनाजी नामक तीन कवि प्रमुखता से उभरकर आते हैं। दुरसाजी की संतति में ये तीनों ही किसनाजी नामक कवि अति प्रसिद्ध हैं। Raghuvarjasprakas

रघुवरजसप्रकास (Raghuvarjasprakash) – रघुवर जस प्रकाश (Raghuvar Jas Prakash) – Charan Kisnaji Aadha Virachit Raghuvarjasprakash – Raghuwarjasprakash

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