करमसोत राठौड़ों का गौरवमय इतिहास
प्रस्तुत पुस्तक जोधपुर राज्य के संस्थापक राठौड़ वंश के प्रतापी शासक राव जोधाजी के पुत्र राव करमसीजी के वंशजों के 550 वर्षों के गौरवमय इतिहास एवं उनके द्वारा राष्ट्रीय इतिहास में दिये गये योगदान को दर्शाती है। इस पुस्तक में राव करमसीजी के पाटवी ठिकाणे खींवसर के साथ-साथ लगभग एक सौ ठिकानों का राजनैतिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक इतिहास का लेखन किया गया है। करमसोत राठौड़ों ने मारवाड़ ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण राजस्थान के अलग-अलग रियासतों में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देते हुए ठिकाने स्थापित किये। Karamsot Rathore Gauravmay Itihas
करमसोत राठौड़ों का इतिहास स्वाभिमान, कीर्ति, गौरवशाली परम्पराएँ, त्याग और बलिदान का इतिहास रहा है। जिसे इस पुस्तक में लेखक ने विस्तार से लिखने का प्रयास किया है। मारवाड़ राज्य एवं ठिकाणों के मध्य प्रशासनिक एवं पारम्परिक सम्बन्धों को भी तथ्यों एवं सन्दर्भों के साथ पुस्तक में उल्लेखित किया गया है। साथ ही राव करमसीजी से लेकर वर्तमान तक की वंशावलियों का लेखन इस पुस्तक को और अधिक रोचकता प्रदान करता है। नि:संदेह राठौड़ वंश की करमसोत शाखा के इस गौरवमय इतिहास के प्रकाश में आने से शोध की दृष्टि से नवीन मार्ग प्रशस्त होंगे।
“स्वतन्त्रता की बलिवेदी पर अपने प्राणों की अनवरत आहुति दे देकर, अपने रक्तामृत से मातृभूमि का अभिषेक करने वाले शूरवीरों का इतिहास हमारे पूर्वजों की धवल कीर्ति से परिपूर्ण अखण्ड ज्योति है जिसका प्रकाश और स्पन्दन जन-मन में आत्मगौरव, मर्यादा, स्वाभिमान, स्वाधीनता, प्रणवीरता, निस्वार्थता, कर्त्तव्यपरायणता, निर्भीकता, शरणागत वत्सलता, आदर्शवादिता, और सत्यवादिता की भावना का निरन्तर संचार करता है।” Karamsot Rathore Gauravmay Itihas
The Glorious History of Karamsot Rathores
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