विवेकानन्द ग्रन्थावली : यह शक्ति क्या है जो हमारे शरीर में व्यक्त होती है ? यह हम सब लोगों को प्रकट है कि वह चाहे जो शक्ति हो, वह परमाणुओं को जोड़ बटोर कर हमारे और तुम्हारे शरीर की रचना करने नहीं आता। मैंने यह नहीं देखा कि खाए कोई और तृप्ति हो मुझे। मैं ही अन्न खाकर उसे पचाता हूँ और उसके रस को लेकर रक्त, माँस, मज्जा और अस्थि रूप में उसे परिणत करता हूँ। यह कौन अदभुत शक्ति है ? भूत और भविष्य का भाव ही कितनों के कलेजे को हिला देता है। कितनों का तो केवल कल्पना मात्र जान पड़ते है। वर्तमान काल ही को ले लीजिए। वह कौन सी शक्ति है, जो हमारे भीतर काम कर रही है। हमें यह भी ज्ञात है कि सारे प्राचीन साहित्य में यह शक्ति, शक्ति की यह अभिव्यक्ति जो एक अत्यन्त उज्जवल व प्रकाशमय पदार्थ मानी गई थी, इसी शरीर के आकार प्रकार की थी और इस शरीर के पंचतत्व प्राप्त होने पर रह जाती थी। इसके पीछे धीरे-धीरे यह उच्च गति बदला करती थी। ऐसे लोग जो अपने साथ संसार में बहुत सी आकर्षण शक्ति लेकर आते है, जिनकी आत्मा सैकड़ों और सहस्त्रों में काम करती है, जिनके जीवन दूसरों में आध्यात्मिक अग्नि प्रज्वलित कर देते है, ऐसे लोगो का आश्रय हम सदा से देखते आ रहे है, वही धर्म था। उनमें संचालन शक्ति धर्म के लिए सबसे बड़ा संचालक बल है और उसका प्राप्त करना ही प्रत्येक मनुष्य का जन्मसिद्व स्वत्व और स्वभाव है।
Vivekanand Granthawali
विवेकानन्द ग्रन्थावली
Author : Chandradhar Sharma Guleri
Language : Hindi
Edition : 2016
ISBN : 9789385593338
Publisher : RG GROUP
Original price was: ₹425.00.₹349.00Current price is: ₹349.00.






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