Bhartiya Riyasaton Ki Angrejo Se Sandhiyan

भारतीय रियासतों की अंग्रेजों से संधियाँ (राजपूताना खंड)
Compiled by : C. U. AITCEIISON, B.C.S.
Translator : Munnalal Dakot
Language : Hindi
Edition : 2026
ISBN : 9789372457438
Publisher : Rajasthani Granthagar

Original price was: ₹1,495.00.Current price is: ₹1,199.00.

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भारतीय रियासतों की अंग्रेजों से संधियाँ (राजपूताना खंड)

Compiled by C. U. AITCEIISON, B.C.S.

राजनीति में सन्धि को समझौते के अर्थ में लिया जाता है। सन्धि निजी और प्रशासनिक दोनों स्तर पर होती हैं। आज-कल देशों और उनकी सरकारों के बीच पारपत्र, पूंजी निवेश, व्यापार, पर्यटन आदि के लिए समझौते होते हैं। पुराने समय में सन्धियाँ परस्पर सहयोग, स्नेह सम्बन्ध और अन्य व्यवहार के लिए होती थी। Bhartiya Riyasaton Angrejo Sandhiyan

प्राचीन भारतीय सन्धियों का स्वरूप क्या रहा? अभिलेखों में सान्धिविग्रहिक जैसा आधिकारिक पद होता था और वह युद्धादि के विषयों पर विचार करता हुआ अपने राष्ट्र के हित को देखता था। ये पदाधिकारी किस प्रकार की सन्धियाँ करते थे, ऐसा लिखित साक्ष्य नहीं मिलता किन्तु यह निश्चित है कि सोलह प्रकार की सन्धियों में से किसी न किसी प्रकार की सन्धि अवश्य होती थी। उत्तर मध्यकाल में युद्धपंच जैसा एक पद सामने आता है। महाराणा जयसिंह गुणवर्णन नामक ग्रन्थ में युद्धपंच की भूमिका को समझा जा सकता है। वह युद्ध का संचालन ही नहीं करता बल्कि रणांगण में व्यूह और रणनीति का नियोजक भी होता था। हल्दीघाटी में बदायूंनी और सिरोही के युद्ध में एक पंचोली इसी भूमिका में थे।

भारतीय रियासतों की अंग्रेजों से संधियाँ (राजपूताना खंड) – Bhartiya Riyasaton Angrejo Sandhiyan

बहुत सी सन्धियाँ लेन-देन, मर्यादाओं के निर्धारण सहित विश्वास के आधार पर होती थी और वे लिखित हों, यह बहुत आवश्यक नहीं माना जाता होगा। लेखन की विविध विधाओं की सूचनाओं और प्रारूपों के संग्रह लेखपद्धति में जितने प्रकार के पत्रों के प्रारूप मिलते हैं, उनमें किसी समझौता -पत्र का उदाहरण नहीं है जबकि सन्धिविग्रह के प्रति लिखे जाने वाले पत्र के प्रारूप मिलते हैं। ये पत्र राजकीय या प्रशासनिपेक्षाओं के सूचक होते हैं। सान्धिविग्रहिक को राजाज्ञा लिखित में प्रेषित की जाती थी और वह तदनुसार ही अपेक्षित कार्य करने का प्रयास करता था। यह बहुत महत्वपूर्ण है कि ऐसे पत्र समय-समय पर व्यवहार में रहे होंगे। अन्य विविध पत्रों के प्रारूप हमें ‘राजतरंगिणी’, दलपतिराय के ‘प्रशस्तिरत्नकोश’ और विद्यापति की ‘लिखनावली’ आदि में मिलते हैं।‘प्रशस्तिप्रकाशिका’ का भी अपना महत्व है।

Bharatiya Riyasaton Ki Angrezon Se Sandhiyan (Rajputana Khand) | A Collection of Treaties, Engagements And Sanads RAJPUTANA | Charles Umpherston Aitchison

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