चिरजा साहित्य में चारण देवियां : पौराणिक देवियों एवं आद्या-शक्ति हिंगलाज की अवतारी परम्परा में ‘नौ लख लोवड़ियाल’ संज्ञा से अभिहित चारण लोक देवियों के आख्यान को उपजीव्य बनाकर रचित चिरजा-साहित्य का राजस्थानी शक्ति-काव्य में विशिष्ट स्थान है। प्राणी-मात्र के प्रति करुणा, जन एवं पर्यावरण की रक्षा तथा लोक-कल्याण की अंतः सलिला से समन्वित चिरजा-साहित्य वर्ण्य-विषय की उदात्तता एवं शिल्प की उत्कृष्टता से अभिमंडित तथा चिरन्तन युग-बोध से संसिक्त है। डॉ. सीमन्तिनी पालावत ने शाक्त परम्परा में भक्ति के उन्मेष की दृष्टि से चिरजा-साहित्य के अप्रतिम अवदान को प्रस्तुत ग्रन्थ में रेखांकित किया है। राजस्थान के इतिहास में युगान्तरकारी घटना के रूप में आठवीं-नवीं शताब्दी में आवड़ के आविर्भाव एवं तत्पश्चात् बिरवड़, करणी, गीगाय प्रभृति अन्य चारण देवियों के इतिवृत का लेखिका ने ऐतिहासिक दृष्टि से शोध-परक विवेचन किया है। प्रस्तुत ग्रन्थ में विदुषी लेखिका द्वारा किए गए चिरजा-विधा के समीक्षात्मक अध्ययन से शोध के नवीन आयाम उद्घाटित होंगे तथा विश्व-साहित्य में राजस्थानी-साहित्य की इस विशिष्ट विधा का स्थान रेखांकित हो सकेगा।
Chirja Sahitya mein Charan Deviyan
चिरजा साहित्य में चारण देवियां
Author : Simantini Palawat
Language : Hindi
ISBN : 9789384168544
Edition : 2015
Publisher : RG GROUP
₹400.00






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