Bachchon ke Patra

बच्चों के पत्र
Author : Dr. Suraj Singh Negi, Dr. Meena Sirola
Language : Hindi
ISBN : 9789390179169
Edition : 2021
Publisher : RG Group

250.00

बच्चों के पत्र : पत्र लेखन की मुहिम डॉ. सूरजसिंह नेगी के अथक प्रयासों का जीता जागता उदाहरण है। नन्हे-मुन्ने बालकों के कोमल हृदय में अपनों के नाम पत्र लेखन का बीजारोपण कर, उनके अंतर मन के उद्गारों को अपनों के नाम लिखने का अवसर प्रदान किया है। पत्र लेखन उन्हें चिंता के स्थान पर चिंतन, मनन एवं व्यथा के स्थान पर व्यवस्था करने का गुण प्रदान करती है। पाती बालकों के अंतर्निहित भावों, अनुभूतियों एवं विचारों की अभिव्यक्ति करती है।
पत्र लेखन के संग्रह का मूल उद्देश्य बालकों के अंतर्मन में उपजे सवालों को केवल कागज पर पुतवाना नहीं बल्कि उन्हें स्थायित्व प्रदान कर आने वाली पीढिय़ों के लिए संग्रहित करना है। पत्र लेखन के संग्रह का महत्व इस कारण भी बढ़ जाता है कि इसमें नन्हे-मुन्ने बालकों के पवित्र हृदय से निकलने वाले सच्चे और शुद्ध विचार हैं, जो अपनों के लिए लिखे गए हैं।
जिस प्रकार एक पखेरु अपने दोनों पंखों के माध्यम से गगन में उड़ता है, उसी प्रकार लेखक के मन के भाव और विचारों के पंख उसे अपनी लेखनी के माध्यम से आगे ले जाते हैं। सर्जनकार के मन में भी भाव और विचार गंगा-जमुना की तरह हिलोरे लेते रहते हैं। कभी गंगा में तो कभी जमुना में डुबकियाँ लगाते हैं।
पत्र लेखन ग्रामीण परिवेश में जीवन यापन करने वाले बालकों को अपनों के नाम आत्मा अभिव्यक्ति का वाहक है। इस गंभीर विधा के उपक्रम से जुड़कर विद्यार्थियों ने अपनों को विश्वास भी दिलाया है कि हम आपके सपनों को पूर्ण करने के लिए कृत संकल्प भी हैं, जो स्वागत योग्य है।
इस पवित्र लेखन संग्रह की महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि जिसने इस संग्रह को संग्रहणीय बनाया और बालमन के सरल, सहज, स्वाभाविक भावों और विचारों को संग्रहित कर आने वाली पीढिय़ों के लिए एक मार्ग भी दिखाया है। डॉ. नेगी एवं डॉ. मीना सिरोला का यह प्रयास आने वाले पीढिय़ों के लिए सुरक्षित एवं अटल रहेगा।
पत्र लेखन के प्रति लेखकों की रुचि कम होती जा रही है। मोबाइल अधिक प्रिय हैं, क्योंकि संप्र्रेषण शीघ्र ही हो जाता है, जबकि पाती लेखन की प्रभावोत्पादकता का परिचय देर से प्राप्त होता है।
पत्र लेखन का संग्रह एक नवीन पहल है। पत्र लेखन एवं सग्रह का प्रयास इसलिए भी सराहनीय है कि स्कूली बालकों को आत्माभिव्यक्ति करने का अवसर मिला है। पत्र लेखन संग्रह में रागात्मकता-बौद्धिकता का सामंजस्य हैं।
लेखन का प्रकाशन ही शिक्षित समाज को सामने लाकर उसे स्थायित्व प्रदान करता है। अपनों के द्वारा अपनों के लिए लिखी अंतरात्मा की अभिव्यक्ति है ‘पाती’।

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