Satsai is a unique genre of Muktak poetry. The word “Satasai” is derived from “Sat” and “Say”, ‘Sat’ means Seven, and ‘Say’ means “hundred”. Thus Satsai poetry is that poetry, which consists of seven hundred verses. Satsaias predominantly use the verses “Doha”; The “Soratha” and “Barwai” verses are also used interchangeably with “Doha”.
Raso Kavya is a book composed in the beginning of Hindi. There are mostly heroic stories in it. Prithvirajasso is the famous Hindi Raso poetry. Ras literature is related to Jain tradition, while Raso is mostly related to heroic poetry, which was written in Dingle language.

सतसई, मुक्तक काव्य की एक विशिष्ट विधा है। “सतसई” शब्द “सत” और “सई” से बना है, “सत” का अर्थ सात और सई का अर्थ “सौ” है। इस प्रकार सतसई काव्य वह काव्य है, जिसमें सात सौ छंद होते हैं। सतसइयों में प्रमुख रूप से “दोहा” छंद का प्रयोग होता है; “दोहा” के साथ “सोरठा” और “बरवै” छंद का प्रयोग भी सतसईकार बीच-बीच में कर देते हैं।
रासो काव्य हिन्दी के आदिकाल में रचित ग्रन्थ हैं। इसमें अधिकतर वीर-गाथाएं हीं हैं। पृथ्वीराजरासो प्रसिद्ध हिन्दी रासो काव्य है। रास साहित्य जैन परम्परा से संबंधित है तो रासो का संबंध अधिकांशत: वीर काव्य से, जो डिंगल भाषा में लिखा गया।

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