जसोल का इतिहास (भाग 2) | Jasol ka Itihas (vol. 2)

Author: Nahar Singh Jasol, Bhanwarlal Bhadani
Language: Hindi

600.00

SKU: RG130-1 Category:

केवल राजस्थानी स्त्रोतों पर आधारित अपने आश्रितों के द्वारा लिखी गयी गौरव गाथा के सुरों से गुंजायमान, क्षेत्रीय इतिहास के तौर पर लिखे राजस्थान-मारवाड़ के ठिकानों के इतिहास-ग्रंथों से जसोल के इस इतिहास का स्वरूप पूरी तरह से अलग है। राजस्थानी के साथ संस्कृत, फारसी और अंग्रेजी स्त्रोतों की निष्पक्ष समीक्षा के आधार पर प्रस्तुत यह लेखन अपने आपको क्षेत्र विशेष तक सीमित न रख कर केन्द्रीय सत्ता तथा राजस्थान की अन्य रियासतों के साथ जसोल के खट्टे-मीठे संबंधों को प्रस्तुत करते हुए शासकों की उपलब्धियां गिनाकर ही विराम नहीं लेता अपितु जसोल ठिकाने की कृषि व्यवस्था, अर्थव्यवस्था, जलस्त्रोत, यहाँ लगने वाले मेले और उनसे होने वाली आय, शासकों के विवाह-सम्बंध, सतियों और महासतियों, मंदिरों के शिलालेखों आदि के सांस्कृतिक विवेचन से जसोल के राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक स्वरूप का एक सम्पूर्ण रंगीन चित्र प्रस्तुत करता है। इन्द्रधनुष की तरह, बहुरंगी, बहुढंगी, शासक से लेकर आमजन तक को जोड़ने वाला, जमीन से जुड़ा यह इतिहास, ठिकानों के इतिहास के पुनर्लेखन के लिये न केवल प्रेरित करेगा वरन् आदर्श इतिहास ग्रंथ के रूप में मार्गदर्शक सिद्ध होगा, यही इसकी सबसे बड़ी उपादेयता है। पुस्तक का यह दूसरा खण्ड जिसकी प्रतीक्षा पहले के ठीक बाद से निरन्तर बनी रही है।

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