हिन्दुओं के सालभर के व्रत एवं त्योहार | Hinduon ke Saalbhar ke Vrat evam Tyohar

Language: Hindi
Edition: 2017
ISBN: 9788188757442

300.00

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दीपाली भण्डारी | Dipali Bhandari

भारतीय संस्कृति में व्रत-त्योहार, उत्सव, मेले आदि अपना विशेष महत्त्व रखते हैं। हिन्दुओं के ही सबसे अधिक त्योहार मनाए जाते हैं, कारण हिन्दु ऋषि-मुनियों ने त्योहारों के रूप में जीवन को सरस और सुंदर बनाने की योजनाएं रखी हैं। प्रत्येक त्योहार, व्रत, उत्सव, मेले आदि का एक गुप्त महत्त्व है। प्रत्येक के साथ भारतीय संस्कृति जुड़ी हुई है । वे विशेष विचार अथवा उद्देश्य को सामने रखकर निश्चित किए गए हैं।
भारतीय संस्कृति में प्रकृति का साहचर्य विशेष महत्त्व रखता है। ऋतुओं का परिवर्तन अपने साथ विशेष निर्देश लाता है। कृषि प्रधान होने के कारण प्रत्येक ऋतु-परिवर्तन हंसी-खुशी, मनोरंजन के साथ अपना-अपना उपयोग रखता है। इन्हीं अवसरों पर त्योहारों का समावेश किया गया है, जो उचित है। प्रथम श्रेणी में वे व्रत, उत्सव, त्योहर ओर मेले हैं, जो सांस्कृतिक हैं और जिनका उद्देश्य भारतीय संस्कृति के मूल तत्त्वों और विचारों की रक्षा करना है। इस वर्ग में हिन्दुओें के सभी बड़े-बड़े त्योहर आ जाते हैं, जैसे -होलिका उत्सव, दीपावली, वसंत, श्रावणी, संक्रांति आदि। संस्कृति की रक्षा इनकी आत्मा है।
दूसरी श्रेणी में वे त्योहार आते हैं, जिन्हें किसी महापुरुष की स्मृति में मनाया जाता है। जिस महापुरुष की स्मृति के ये सूचक हैं, उनके गुणेां, लीलाओं, पावन चरित्र महानताओं का स्मरण रखने के लिए इनका विधान है। इसी श्रेणी में रामनवमी, कृष्णाष्टमी, भीष्म-पंचमी, हनुमान-जयंती, नाग पंचमी आदि त्योहार रखे जा सकते हैं।

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