हाडौती की जल संस्कृति | Hadoti Ki Jal Sanskriti

Language: Hindi

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अनुकृति उज्जैनिया | Anukrti Ujjainiya

हाड़ौती क्षेत्र अपनी कला एवं संस्कृति के लिए विश्व विख्यात है। हाड़ौती की जल संस्कृति की जानकारी के लिए सर्वोतम साधन यहाँ के शिलालेख हैं, जो विभिन्न कुण्डो व बावड़ियो के पाषाण पर उकेरे गये है और अतीत के जल प्रबन्धन को उजागर करते हैं। हाड़ौती में सभ्यता व संस्कृति की पहचान से सम्बन्धित प्रामाणिक स्मारको, दुर्गो, कुओं, बावड़ियों, कुण्डों, तालाबों व झीलों की कोई कमी नहीं है। इसी भावना से प्रेरित होकर लेखिका ने इस पुस्तक की रचना करने का कार्य हाथ में लिया।
इस पुस्तक के लेखन में हिन्दी व अँग्रेजी के साहित्यिक ग्रंन्थो, राष्ट्रीय व राज्य अभिलेखागारों से प्राप्त सामग्री, पाण्डुलिपियों, बहियों तथा हाड़ौती के गांवो व नगरो में घुम-घुम कर जलस्त्रोतो में लगे शिलालेख से प्राप्त ऐतिहासिक शोध सामग्री का विश्लेषण कर लेखन में शामिल किया गया है। पुस्तक रचना का मुख्य उद्देश्य हाड़ौती के जलस्त्रोतों को परिष्कृत कर क्षेत्रीय व सामाजिक स्तर पर जलस्त्रोतों के प्रति जन जागृति लाना है एवं जलप्रबन्धन की तकनीकों को उजागर करने के साथ साथ ही पर्यटन की संभावनाओ को प्रसारित करना है। यही नहीं इस पुस्तक में अनेक जलस्त्रोतों व उन पर उकेरे शिलालेखो की प्रथम बार गवेषणा कर कला एवं स्थापत्य को उजागर किया गया है।
जल की कमी राजस्थान की ज्वलन्त समस्या है। इस दृष्टि से हाड़ौती के जलप्रबन्धन का पुर्नरूद्धार किया जाकर इन शोध वर्णनो के आधार पर जल संस्कृति के मूल स्वरूप को प्राप्त किया जा सकता है। मैं आभारी हूँ प्रकाशक राजस्थानी ग्रन्थागार, का जिसने इस पुस्तक के प्रकाशन का महत्वपूर्ण कार्य हाथ में लिया है।

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