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राजस्थान में मुश्किल से कोई महीना ऐसा जाता होगा, जिसमें धार्मिक उत्सव न हो। सबसे उल्लेखनीय व विशिष्ट उत्सव गणगौर है, जिसमें महादेव व पार्वती की मिट्टी की मूर्तियों की पूजा 15 दिन तक सभी जातियों की स्त्रियों के द्वारा की जाती है, और बाद में उन्हें जल में विसर्जित कर दिया जाता है। विसर्जन की शोभायात्रा में पुरोहित व अधिकारी भी शामिल होते हैं व बाजे-गाजे के साथ शोभायात्रा निकलती है। हिन्दू और मुसलमान, दोनों एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होते हैं। इन अवसरों पर उत्साह व उल्लास का बोलबाला रहता है। एक अन्य प्रमुख उत्सव अजमेर के निकट पुष्कर में होता है, जो धार्मिक उत्सव व पशु मेले का मिश्रित स्वरूप है। यहाँ राज्य भर से किसान अपने ऊँट व गाय-भैंस आदि लेकर आते हैं, एवं तीर्थयात्री मुक्ति की खोज में आते हैं। अजमेर स्थित सूफ़ी अध्यात्मवादी ख़्वाजा मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह भारत की मुसलमानों की पवित्रतम दरगाहों में से एक है। उर्स के अवसर पर प्रत्येक वर्ष लगभग तीन लाख श्रद्धालु देश-विदेश से दरगाह पर आते हैं।

भारत सरकार, भारत की तथा इसके प्रत्‍येक भाग की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायी है। भारतीय शस्‍त्र सेनाओं की सर्वोच्‍च कमान भारत के राष्‍ट्रपति के पास है। राष्‍ट्र की रक्षा का दायित्‍व मंत्रिमंडल के पास होता है। इसका निर्वाहन रक्षा मंत्रालय द्वारा किया जाता है, जो सशस्‍त्र बलों को देश की रक्षा के संदर्भ में उनके दायित्‍व के निर्वहन के लिए नीतिगत रूपरेखा और जानकारियां प्रदान करता है। भारतीय शस्‍त्र सेना में तीन प्रभाग हैं भारतीय थलसेना, भारतीय जलसेना, भारतीय वायुसेना और इसके अतिरिक्त, भारतीय सशस्त्र बलों भारतीय तटरक्षक बल और अर्धसैनिक संगठनों  (असम राइफल्स, और स्पेशल फ्रंटियर फोर्स) और विभिन्न अंतर-सेवा आदेशों और संस्थानों में इस तरह के सामरिक बल कमान अंडमान निकोबार कमान और समन्वित रूप से समर्थन कर रहे हैं डिफेंस स्टाफ। भारत के राष्ट्रपति भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर है। भारतीय सशस्त्र बलों भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय (रक्षा मंत्रालय) के प्रबंधन के तहत कर रहे हैं।

वैसे तो राजस्थान की संस्कृति ही निराली है। वहीं राजस्थान के प्राचीन महल और अन्य पर्यटन स्थलों को देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक यहां आते है। यहां के पर्यटन स्थल और संस्कृति ही नहीं बल्कि एक और कारण है जिसके कारण पर्यटक ही नहीं बल्कि देश के कई लोग यहां खिचे चले आते हैं। राजस्थानी संस्कृति में कई तरह के गहने अपनी एक अलग पहचान को बनाएं है चाहे वह माथे पर पहनने वाला मांग टीका हो या फिर हाथ में बाजुओं पर पहनने वाला बाजुबंद हो यह सभी अपनी ज्वैलरी में एक पहचान को रखे हुए है।

ऐसे में कुंदन वर्क में की गई सोने के आभूषणों पर रत्नों की जड़ाई से की मीनाकारी जयपुर और नाथद्वारा में बहुतायत रुप से प्रसिद्ध है। अच्छे दामों पर कुंदन ज्वैलरी, आर्टिफिशियल ज्वैलरी कुंदन, कुंदन माला, कुंदन कान की बाली, कुंदन सेट, हमारे राजस्थान के जयपुर शहर में मिल जाता है। अधिकतर दुलहन बिलकुल अलग हटकर डिजाइन मांगती है।

आयुर्वेद (आयुः + वेद = आयुर्वेद) विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। यह ऋग्वेद का उपवेद है। यह विज्ञान, कला और दर्शन का मिश्रण है। ‘आयुर्वेद’ नाम का अर्थ है, ‘जीवन का ज्ञान’ और यही संक्षेप में आयुर्वेद का सार है।
आयुर्वेद और आयुर्विज्ञान दोनों ही चिकित्साशास्त्र हैं परन्तु व्यवहार में चिकित्साशास्त्र के प्राचीन भारतीय ढंग को आयुर्वेद कहते हैं और ऐलोपैथिक प्रणाली (जनता की भाषा में “डाक्टरी’) को आयुर्विज्ञान का नाम दिया जाता है।

हिताहितं सुखं दुःखमायुस्तस्य हिताहितम्।
मानं च तच्च यत्रोक्तमायुर्वेदः स उच्यते॥
-(चरक संहिता १/४०)

अर्थात जिस ग्रंथ में – हित आयु (जीवन के अनुकूल), अहित आयु (जीवन के प्रतिकूल), सुख आयु (स्वस्थ जीवन), एवं दुःख आयु (रोग अवस्था) – इनका वर्णन हो उसे आयुर्वेद कहते हैं।

राजस्थानी भाषा के साहित्य की संपूर्ण भारतीय साहित्य में अपनी एक अलग पहचान है। राजस्थानी का चीन साहित्य अपनी विशालता एवं अगाधता मे इस भाषा की गरिमा, प्रोढ़ता एवं जीवन्तता का सूचक है। अनकानेक ग्रन्थों के नष्ट हो जाने के बाद भी हस्तलिखित ग्रन्थों एवं लोक साहित्य का जितना विशाल भण्डार राजस्थानी साहित्य का है, उतना शायद ही अन्य भाषा में हो। विपुल राजस्थानी साहित्य के निर्माणकर्ताओं को शैलीगत एवं विषयगत भिन्नताओं के कारण निम्न पांच भागों कें विभक्त कर सकतें है-
(1) जैन साहित्य
(2) चारण साहित्य
(3) ब्राह्यण साहित्य
(4) संत साहित्य
(5) लोक साहित्य

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RAJASTHANI GRANTHAGAR is one of the leading independent publishing houses in the Indian subcontinent with focused academic publishing on Rajasthan History, Culture and Literature. More than 35 Years old, RAJASTHANI GRANTHAGAR continues its established tradition of publishing researched books for the furtherance, acquisition, betterment and dissemination of knowledge in subjects like Rajasthan History, Kota Bundi, Nagaur, Bikaner, Jodhpur, Jaipur, Jaisalmer, Sirohi, Jalore, Bhinmal, Udaipur etc. Books on Great Rajput Warriors such as Maharana Pratap, Rajasthan’s Freedom Fighters, Meera Bai, Water Resources on Rajasthan, God-Goddesses of Rajasthan, Rajasthani Literature, Rajasthan Folk Literature, Rajasthani Historians etc.

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